Nazm aur ghazal mein farq
Nazm aur ghazal mein farq
ग़म, तन्हाई और जुदाई की शायरी।
Nazm aur ghazal mein farq
ग़ज़ल क्या है — रदीफ़, क़ाफ़िया, मतला, मक़ता
मोमिन का वह शेर जिसके बदले ग़ालिब ने अपना पूरा दीवान देने की बात कही थी — तन्हाई और हाज़िरी दोनों एक साथ।
इक़बाल का सबसे मशहूर शेर — अपने आप को इतना बुलंद कर लो कि तक़दीर लिखने से पहले राय पूछी जाए।
ग़ालिब का सबसे मशहूर मतला — ऐसी हज़ारों ख़्वाहिशें कि हर एक पर जान जाए, और फिर भी सब कम ही रहीं।
तीन सौ साल पुराने शेर जो आज के थके हुए दिन पर भी लागू होते हैं — वजूद, वक़्त, घमंड और ख़ुदी पर छह क्लासिकी शेर, भावार्थ और शब्दार्थ के साथ।
इश्क़ के पाँच पड़ाव — पहली नज़र से उस हद तक जहाँ जीने-मरने का फ़र्क़ मिट जाता है। हर शेर का भावार्थ, शब्दार्थ, और भेजने का सही वक़्त।
मीर की एक ही ग़ज़ल के मतला और मक़ता लेकर ग़ज़ल का पूरा ढाँचा एक जगह — रदीफ़ और क़ाफ़िया का फ़र्क़, तुलना तालिका और चार असली सवालों के जवाब।
ग़म की किस्म के हिसाब से रखे गए पाँच क्लासिकी शेर — अपना ग़म, किसी का दिया हुआ ग़म और थक जाने का ग़म — हर एक का भावार्थ और शब्दार्थ के साथ।